
1️⃣ 1 ब्रह्म परम वास्तविकता — 2 सत् अस्तित्व/सत्ता ✅ सकारात्मक 3 चित् चेतना ✅ 4 आनंद पूर्णता/आनंद ✅ 5 सत्य सत्य/यथार्थ ✅ 6 ज्ञान ज्ञान/बोध ✅ 7 अनंत असीम ✅ 8 विज्ञान विशिष्ट/प्रत्यक्ष बोध ✅ 9 प्रज्ञान प्रज्ञा/चैतन्य-बोध ✅ 10 आत्मा स्वयं/स्वरूप — 11 आत्मन् Self/स्व — 12 परमात्मा परम आत्मा — 13 पुरुष पुरुष/चैतन्य सत्ता — 14 एकम् एक ✅ 15 अद्वितीय जिसका दूसरा नहीं ❌ नकारात्मक 16 पूर्ण पूर्ण ✅ 17 परिपूर्ण सर्वथा पूर्ण ✅ 18 नित्य शाश्वत ✅ 19 अक्षर अविनाशी ❌/सीमाभंग 20 अविनाशी जिसका विनाश नहीं ❌ 21 अमृत अमर/अविनाशी ✅/नकारात्मक संकेत 22 अभय भय से रहित ❌ 23 शांत शांति-स्वरूप ✅ 24 शान्तम् शांत ✅ 25 शिवम् मंगल/कल्याणस्वरूप ✅ 26 केवल अकेला/एकमात्र — 27 कैवल्य पूर्ण एकत्व/स्वतंत्रता — 28 स्वयंज्योति स्वयं प्रकाशित ✅ 29 ज्योतिः प्रकाश ✅ 30 प्रकाश प्रकाश/प्रकाशक चेतना ✅ 31 चैतन्य चेतना ✅ 32 साक्षी साक्षी-चेतना — 33 द्रष्टा देखने वाला — 34 ज्ञाता जानने वाला — 35 कूटस्थ अचल/अपरिवर्तनशील ❌/सीमाभंग 36 निरपेक्ष किसी पर निर्भर नहीं ❌ 37 स्वतंत्र परतंत्रता से रहित ✅ 38 स्वयम्भू स्वयं से स्थित ✅ 39 स्वयंसिद्ध स्वयं-सिद्ध ✅ 40 सर्वव्यापी सबमें व्याप्त ✅ 41 सर्वज्ञ सबका ज्ञाता ✅ 42 सर्वशक्तिमान सभी शक्तियों का आधार ✅ 43 अंतर्यामी भीतर से नियामक — 44 सर्वात्मा सबका आत्मस्वरूप ✅ 45 सर्वम् सब कुछ ✅ 46 तुरीय चौथी/अतीन्द्रिय अवस्था — 47 निर्गुण गुणों से रहित ❌ 48 निराकार आकार से रहित ❌ 49 निष्क्रिय क्रिया से रहित ❌ 50 नेति-नेति यह नहीं, यह नहीं ❌ 32 सकारात्मक (via positiva) 11 नकारात्मक (via negativa) 7 संदर्भ-निर्भर/मिश्रित Via positiva भी अंततः किसी वस्तु का वर्णन करने के लिए नहीं, बल्कि मन को सत्य की ओर मोड़ने के लिए है। 2️⃣ ज्यादातर सकारात्मक की होती है क्योंकि सत्य की बात करना भी एक तरह से अहंकार है नकारात्मक इसलिए नहीं करता कि निर्ममता से खुद को देखना पड़ता है। भाषा ही ऐसी होती है, सत्य के ओर।


















