
Mukesh
१-जब अपेक्षा ही नहीं थी तो फिर हिसाब कैसा और २-अगर अपेक्षा का कोई भी स्तर उपस्थित था तो हिसाब का स्तर तो खुद बन जाता है
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१-जब अपेक्षा ही नहीं थी तो फिर हिसाब कैसा और २-अगर अपेक्षा का कोई भी स्तर उपस्थित था तो हिसाब का स्तर तो खुद बन जाता है
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