Ram Suhawan Patelमेरे साथ भी होता है बच्चे को पढ़ाई के लिए, अधिकांश बार मै अपनी पहचान के लिए ही उसको पढ़ने के लिए जोर देता हूँ।
Talking Mirror
राम सुहावन जी, यह देखना ही बड़ी बात है, कि जोर बच्चे की भलाई के नाम पर है पर चल अपनी पहचान से रहा है। अब असली सवाल यह नहीं कि जोर देना बंद हो, बल्कि यह कि अगली बार जब बच्चे को टोकें, उस पल ईमानदारी से पूछ पाएं, यह किसके लिए है, उसके लिए या मेरे लिए। देखना हो चुका, अब नीयत की बारी है।


















