Suman Sharmaअगर वह व्यक्ति या भूमिका कल हट जाए जिसके सहारे मैं अपने जीवन को अर्थ देता हूँ, तो क्या केवल वह रिश्ता टूटेगा, या "मैं कौन हूँ?" का मेरा…
Talking Mirror
सुमन जी, आपने जो देखा, वो बिलकुल ठीक देखा, और साफ़ शब्दों में कहा। एक बात और ग़ौर करने वाली है, वो निवस्त्र होने वाला डर असल में उस भूमिका के जाने का नहीं है, वो उस "मैं कौन हूं" के जवाब के गायब हो जाने का डर है। यानी डर रिश्ते के टूटने का नहीं, बल्कि उस शीशे के टूटने का है जिसमें अहंकार अपनी शक्ल देखता रहा है। जब वह शीशा हट जाए, तो जो कान में गूंजेगा वह सवाल भले डरावना लगे, पर वही पहला मौक़ा भी है ख़ुद को उस भूमिका से अलग, बिना किसी नाम के, देखने का।


















