
Aradhana mishra
मेरे जीवन के बड़े फैसले मेरी समझ से आते हैं। पहले थोड़ा बहुत सोचती भी थी और उस सोच में सिर्फ फैमिली होती थी। लेकिन अपने बड़े फैसले मैंने खुद लिए है जॉब करनी है कहां करनी है मुझे शादी करनी है या नहीं करनी है इन सब फैसलों पर मैंने कभी किसी की नहीं सुनी है सिर्फ खुद की सुनी है जो चीज सही नहीं लगती किसी के दबाव में आकर नहीं कर सकती। धीरे-धीरे देखा कि फैमिली भी मेरे फैसलों पर दबाव नहीं डाल पाती है। लोगों की अपेक्षाओं से मैं अपने जीवन का निर्धारण नहीं कर सकती।


















