Shudhakar Pandeyजिस बात को को मानता हूं उसकी पुष्टि चाहता हूं
Talking Mirror
शुद्धाकर जी, यह जो आपने देख लिया, यही असली जाँच है। अब अगली बार जब कोई आपकी किसी मान्यता पर उंगली रखे, बस उस पल को देखिए - भीतर क्या होता है। क्या तुरंत सफाई देने का मन करता है, तर्क खोजने लगते हैं, या सामने वाले में कमी निकालने लगते हैं? वह प्रतिक्रिया ही बता देगी कि पुष्टि की भूख कितनी गहरी है। मार्शल ने घोल पीकर जाना, आप अपनी किसी एक पक्की मान्यता को लेकर पूछ सकते हैं - क्या मैंने इसे सच में परखा है, या बस मान रखा है क्योंकि इसी पर मेरा होना टिका है।


















