
Ira Hazra
पहले तो लोग कि अपेक्षाआं से आती है। फिर हमें सोचनें मे मजबूर कर देता है कि यह अपेक्षाओं क्यों है? फिर समझ कि जरूरत पड़ती है। पहले जो समझ में ही नहीं आता था वो आज वहुत स्पष्ट हुआ है । इसिलिए आचार्य जी को वहुत वहुत धन्यवाद ज्ञापन करना चाहता हूँ। 🙏 । आचार्य जी इतने आच्छितरह समझाते हैं की न समझना ही मूश्किल हो जाता (कभी कभी)।


















