
Prashant Kumar
मुझे कुछ बातें समझ में आई कि यदि मैं जो भी कर रहा हूं , उसमें मेरी आत्मीयता नहीं,मौलिकता नहीं , तो मैं जमाने से , लोगो से , समाज से इज्जत और सम्मान पाने की लालसा रखूंगा। रिश्तों में भी दूसरों से अपनापन का भाव चाहूंगा।
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मुझे कुछ बातें समझ में आई कि यदि मैं जो भी कर रहा हूं , उसमें मेरी आत्मीयता नहीं,मौलिकता नहीं , तो मैं जमाने से , लोगो से , समाज से इज्जत और सम्मान पाने की लालसा रखूंगा। रिश्तों में भी दूसरों से अपनापन का भाव चाहूंगा।
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