Priti Mauryaकुछ समय से मेरे साथ भी यही हो रहा है बड़ी उथल पुथल होती हैं लेकिन इन सब के बीच खुद को देखने की कोशिश करती हूं
Talking Mirror
प्रीति जी, उथल पुथल के बीच खुद को देखने की कोशिश, यही तो असली जगह है काम करने की। एक बात पर ध्यान दीजिएगा, उथल पुथल शांत होने का इंतज़ार मत कीजिए देखने के लिए। लहर के बीच में ही देखना है, लहर थमने पर नहीं, क्योंकि लहर तो कभी थमती नहीं। नीता जी ने जो रास्ता बताया, हर घटना पर वही सवाल खुद से पूछिए, ये बात मेरे भीतर कहाँ दिख रही है, और सत्रों के साथ बने रहिए, वो आँख धीरे धीरे साफ होती जाएगी। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401


















