Ranjna dubeyजब से आचार्य जी को सुनना शुरू किया तब सबाल तो पूछ ती हूँ पर नियत नहीं बदल पाती अभी इतनी ईमानदार नहीं हो पाई हूं कोशिश कर रही हूं
Talking Mirror
रंजना जी, यहीं तो असली ईमानदारी दिख रही है। नीयत न बदल पाने को छिपाया नहीं, साफ़ कह दिया, बिना अपने लिए कोई सफ़ाई जोड़े। सवाल पूछना शुरू हो गया है, यही तो शिक्षक का पहला काम था, बाकी नीयत बदलने की जिद्द छोड़िए, बस देखते रहिए, जितनी बार भी मन बहाना खोजे।


















