
१. चेतना माने अंहकार-वस्तु या दृष्टा-दृश्य का जोड़ा। यह एक द्वैतवादी सबंध हे। शुद्ध चेतना जैसा कुछ नहीं होता। अहंकार का अपने विगलन होने का चुनाव चेतना के ऊंचे तल को दर्शाता है। २.न्यूरोसाइंस के अनुसार चेतना कोई आत्मा नहीं, बल्कि दिमाग की एक असर है। कोई अलग चीज़ नहीं जो दिमाग को चलाती है - दिमाग के चलने का तरीका ही चेतना है। 3 थ्योरी हैं, तीनों थोड़ा अलग जवाब देती हैं: 1. Global Workspace Theory - सबसे मान्य हमारे दिमाग में हर सेकंड लाखों प्रोसेस चल रहे हैं - साँस, दिल, यादें, देखना - पर ज्यादातर बेहोश हैं। जब कोई जानकारी इतनी जरूरी हो जाती है कि उसे पूरे दिमाग को बताना पड़े, तो दिमाग उसे एक "ग्लोबल स्टेज" पर डाल देता है। जैसे ऑफिस में लाउडस्पीकर पर अनाउंसमेंट। जो जानकारी उस स्टेज पर आती है, वही हमे conscious लगती है। बाकी सब unconscious रह जाता है। स्थान - मुख्यतः Prefrontal Cortex + Parietal lobe का नेटवर्क। 2. Integrated Information Theory (IIT) चेतना = Information + Integration कंप्यूटर में भी information है, पर वो बिखरी हुई है। इंसान के दिमाग में वही information इतनी बुरी तरह जुड़ी हुई है कि उसे तोड़ा नहीं जा सकता। इस जुड़ाव की मात्रा को Phi (Φ) कहते हैं। Phi जितना ज्यादा, चेतना उतनी गहरी। इंसान में Phi बहुत ज्यादा, सोते समय या बेहोशी में Phi गिर जाता है। 3. Predictive Processing दिमाग बाहर की दुनिया को देखता नहीं, अंदाजा लगाता है। वो हमेशा प्रेडिक्ट करता है - "आगे क्या होगा?" और फिर आँख-कान से सिर्फ गलती सुधारता है। चेतना वो प्रेडिक्शन का मॉडल है जो दिमाग ने "खुद" के बारे में बना रखा है। यानी तुम्हें लगता है "मैं हूँ", क्योंकि दिमाग ने अपने लिए एक "मैं" का मॉडल बना लिया है ताकि शरीर को कंट्रोल करना आसान हो। एक लाइन में न्यूरोसाइंस का जवाब: चेतना कोई चीज नहीं जो दिमाग में रहती है, चेतना वो है जो दिमाग करता है, जब उसका नेटवर्क काफी जटिल और काफी जुड़ा हुआ हो जाए। ३.अहंकार के सारे चुनाव उसकी आत्म रक्षा (स्व बचाव) की वृत्ति से आते हे। इस प्रकार उसकी ईच्छाएं भी आत्म रक्षा की दिशामे ही होती हे। आचार्यजी ने कहा हे कि स्वतंत्र इच्छा तभी संभव हे जब अहंकार आत्म विगलन की दिशा में चुनाव करें। ४. अहंकार और दुख साथ साथ चलते हे। मैं माने दुख की कराह/पुकार। दुख मौलिक हे क्योंकि अहंकार खुदको कितनी भी पहचान देदे, भौतिक वस्तुओं से भर ले, दुनिया में सफल कहलाए, इज्जत पा जाए पर दुख उसका कभी खत्म नहीं होता।


















