Pooja Prajapatiham swanyam or prakriti ka bhog karake apni ichhao ko bs tritp kr rhe h
Talking Mirror
पूजा जी, यह जो देख रही हैं वह ज़रा और गहराई से देखिए। सवाल सिर्फ यह नहीं कि हम भोग कर रहे हैं, बल्कि यह कि भोग के पीछे असली माँग क्या है। शरीर को तो एक सीमा के बाद और कुछ नहीं चाहिए; रोटी का तीसरा टुकड़ा शरीर की ज़रूरत नहीं होती, वह कुछ और है जो तृप्ति माँग रहा है और भोजन से उसे पूरा करने की कोशिश कर रहा है। तो अगली बार जब ज़रूरत से ज़्यादा लेने का मन हो, वहीं रुककर देखिएगा कि यह पेट बोल रहा है या मन कुछ और भरना चाह रहा है। वह खालीपन जो चीज़ों से भरने की कोशिश होती है, उसी को पहचानना असली काम है, न कि केवल इतना कह देना कि हम भोग कर रहे हैं।


















