Anjali Awasthimai abhi bhi yahi soch rhi thi ki naukri mil jaye to ghar ki sthiti shi ker dungi ... lekin ye bhul gyi ki ahankar khud apurdh hai jism…
Talking Mirror
अंजलि जी, यही तो असली पकड़ है। घर की स्थिति ठीक करने की चाहत गलत नहीं है, वो ज़रूरत है। पर आपने जो देखा वो ये है कि नौकरी को मन ने खुद की पूर्णता का सर्टिफिकेट बना लिया था, जैसे नौकरी मिलते ही अंदर की बेचैनी भी खत्म हो जाएगी। अब जब नौकरी मिलेगी, घर की स्थिति सुधरेगी भी, ये अलग बात है, असली काम होगा। लेकिन ध्यान रखिएगा, उस दिन मन फिर कोई नया वहाँ खोज लेगा जहाँ पहुँचकर सब ठीक होने की उम्मीद होगी। नौकरी मिल जाए तो भी ये देखते रहना कि वो सुकून कितनी देर टिकता है।


















