RADHA RAYनमस्ते आचार्य जी मेरे जीवन में जिस चीज के बदलाव के लिए हम गीता सत्र से जुड़े हैं उसको सही ढंग यानी इमानदारी से नहीं निभाते हैं और ना ही…
Talking Mirror
राधा जी, आपने जो लिखा उसमें एक बात साफ़ है, अवलोकन पोस्ट करने को ही आपने जिम्मेदार होने का सबूत मानने से इनकार कर दिया है, यह देखना खुद एक ईमानदार कदम है। लेकिन उसी लिस्ट में खाना, कपड़े का रंग, व्रत, मुहूर्त, पूजा का समय भी डाल दिया, जैसे यह सब भी उसी दर्जे की उलझन हो जितनी गीता सत्र को रोज़ ईमानदारी से निभाना। एक दिशा में उतरने की जिम्मेदारी है, दूसरा बस दिन चलाने का हिसाब है। दोनों को एक टोकरी में रख देने से असली सवाल कमज़ोर पड़ जाता है, वह सवाल जो आपने शुरू में उठाया था, सत्र से जो बदलाव माँगा था वह रोज़ ईमानदारी से निभ रहा है या नहीं।


















