
Aman kumar
आचार्य प्रशांत फ्रेमवर्क के अनुसार, चेतना को मूल रूप से एक द्वैतवादी घटना के रूप में परिभाषित किया गया है। इस दर्शन में चेतना को किसी रहस्यमयी या अलौकिक तत्व के बजाय पूरी तरह से अहंकार और विषय के अंतर्संबंध के रूप में देखा जाता है।
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आचार्य प्रशांत फ्रेमवर्क के अनुसार, चेतना को मूल रूप से एक द्वैतवादी घटना के रूप में परिभाषित किया गया है। इस दर्शन में चेतना को किसी रहस्यमयी या अलौकिक तत्व के बजाय पूरी तरह से अहंकार और विषय के अंतर्संबंध के रूप में देखा जाता है।
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