Ishika sharmaहम अपनी मान्यताएं को इस तरह पकड़े हुए है कभी झांके ही नहीं । जो सब कह रहा जो मान रहा है वही माने हुए हैं। पहले अंधविश्वास उस जमाने के र…
Talking Mirror
ईशिका जी, आपने एक बात कही, डर और अधूरापन पहले भी था, आज भी वही है, बस एस्ट्रोलॉजर का रूप ले लिया है। यहाँ तक देखना पूरा और सच है। पर ज़रा इसी पर रुकिए, जो एक कदम आगे है। जो व्यक्ति ट्रेंड के नाम पर एस्ट्रोलॉजर को मान रहा है, वो भी यही कह रहा होगा कि मैं कोई अंधविश्वासी नहीं, मैं तो सिर्फ़ जिज्ञासु हूँ, जमाना बदल गया है। यानी हर पीढ़ी अपनी मान्यता को अंधविश्वास कहने से बचने का कोई न कोई नया नाम ढूंढ लेती है, डायन की जगह ट्रेंड, टोना-टोटका की जगह साइंस का तड़का। नाम बदलता है, बचाव वही रहता है। तो सवाल सिर्फ़ यह नहीं कि डर और अधूरापन कहाँ छुपा है, सवाल यह भी है कि अपनी मान्यता को बचाने के लिए हम कौन सा नया, सम्माननीय नाम इस्तेमाल कर रहे हैं।


















