
अहंकार द्वारा बनाई चीजों को ही देखते है जैसे मैं या कई लोग आचार्य जी को सुनते है तो कुछ लोगों के घरवाले सुनने से मन करते है जैसे मेरी मम्म जो है वो कहती है ना जाने क्या सुनती रहती है लेकिन कहीं न कही उन्हें पता ही है कि मैं सही चीज सुन रही हु वो बहुत ज्यादा बंधन में ही रहना पसंद करती फाइनेंशियल independence लेकिन वैसे आज़ाद नहीं है किसी ने कुछ कह दिया उसको सोच सोच के खुद का दिमाग ख़राब करना ओर साथ में ये बोलना कि मेरी किसी को पढ़ी ही नहीं ये अब चलता रहता है मैं बस कहना इतना चाहती थी कि कुछ लोगो के घर वालों मन करते है ये अब मत सुना करो तो कई बार आचार्य जी को शिकायत करते है कि मेरे घरवाले सुनने नहीं देते एक जैसे कि मेरी घर में कोई मिल्क छोड़ने को राजी नहीं है तो ये भी आचार्य जी नहीं ही बताया कि " आप क्यों किसी से उम्मीद करते है कि वो आपको समझे उन्होंने जो इतने सालों जिन्नधारों पर चले उन्हें छोड़ते उन्हें दुख तो होगा ही लेकिन वो उस व्यक्ति के ऊपर ही निर्भर करता है कि वो करेगा कैसे हर चीज का इस्तेमाल करेगा तो आपको कोई शि काम से रोक रहा तो उसे से मुंह माफ बनाने लगिए उसे समझाइये अगर आप सच में कुछ अच्छा के रहे हो बाकी हर व्यक्ति स्वतंत्र तो है ही आपकी तरह " 🙏🙏


















