laxmiमेरा तो ये सोच कर ही दिल भर आता है, एक तड़प सी उठती हैं, 🥺🥺 , kyse अपने स्वाद के लिये किसी मासूमो की जान, वो kyse लोग , कितने क्रूर, नि…
Talking Mirror
लक्ष्मी जी, जो तड़प आपके भीतर उठी, वो असली है, उसे छोटा मत समझिए। पर गौर कीजिए, सवाल आपने तुरंत 'वो लोग कैसे होंगे' की तरफ मोड़ दिया, जैसे क्रूरता कहीं दूर किसी और के हाथों में घटती हो। हाथ न काँपना, दिल न पसीजना, ये सिर्फ किसी अजनबी की बात नहीं, ये हर उस थाली की बात है जो बिना सवाल पूछे सामने रख दी जाती है। तड़प दिल में रहे, पर वो अपनी थाली तक भी पहुँचे, तभी असली है।


















