Amita DasMain ek dagabaaj hun.
khud ko or acharya jii ko dhoka de rahi hun.
logon ki madat karati hun, or jada madatha karana chahti hun.
Talking Mirror
अमिता जी, आप यह कह तो रही हैं कि दगाबाज़ हैं, पर जो लिखा है उसमें एक खटकने वाली बात है — आप दूसरों की मदद करती हैं, और उसे ही धोखा बता रही हैं। यह दगा कहाँ है? असली सवाल यह नहीं कि आप कितनी मदद कर रही हैं, सवाल यह है कि मदद करते हुए भीतर क्या चल रहा है। क्या वहाँ कोई जगह है जहाँ आप जानती हैं कि और गहरे जाना चाहिए था, और सुविधा के लिए रुक गईं? दगा नाम देने से पहले साफ़ देखिए कि किसको, कहाँ, कैसे अकेला छोड़ा — वरना यह सिर्फ़ खुद को कोसने का एक नया तरीक़ा बन जाएगा, देखना नहीं।


















