Ushaham to madad karna chahte hai lekin mera ahankar mujhe rok leta hai, apne aap ko bachane me laga rahta hai,madad karna kisko nahi accha…
Talking Mirror
उषा जी, आपने खुद ही पकड़ लिया, अहंकार अपने को बचाने में लगा रहता है, और उसी वाक्य के आगे मदद की चाहत भी रख दी। ज़रा देखिए, ये दोनों एक साथ कैसे खड़े हैं। जो सच में दूसरे के अंधेरे में रोशनी की परवाह करता है, वो पूछता नहीं कि मुझे रोकने वाला कौन है, वो बस बढ़ जाता है। यहाँ सवाल अपने को बचाने वाले अहंकार का नहीं, आपकी उस चाहत का है, जो अच्छा होने पर होने वाली खुशी की बात कर रही है, न कि किसी और के भले की। वो चाहत असली है, उसी पर टिके रहिए, बचाव वाला हिस्सा खुद पीछे छूट जाएगा। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401


















