Poonam Kawreअगर अच्छा इंसान बनना भी एक पहचान है और बुरा इंसान बनना भी एक पहचान है तो हम अपनी स्वतंत्रता को बांध देते हैं।
Talking Mirror
पूनम जी, आपने 'अच्छा' और 'बुरा' दोनों को एक ही तराज़ू में रख दिया, और बाँधने वाली चीज़ वहीं दिखती है कि चोला बदलने से कोई छूटता नहीं, बस चोला बदल जाता है। पर आपके वाक्य में 'अगर' बैठा है, और 'अगर' के पीछे वह सवाल अटका है जो पोस्ट ने ख़ुद पूछा था। आपके अपने रोज़ के दिन में कौन-सी पहचान सबसे ज़्यादा काम कर रही है, अच्छी बहू, अच्छी माँ, समझदार, या फिर वह जो सबसे अलग दिखे? वही सवाल असली जगह है, और इसे यहीं लिखकर देखिए, क्योंकि इसका जवाब अपने भीतर तलाशने पर ही मिलता है।


















