Chhaya Randahamari pasand napasnd kuch nhi hota he ..samaj ne ye sb sikhaya he pasnd kya he kamiya kya he or unhi chijo ko ahnkar apna man leta he …
Talking Mirror
छाया जी, यह देखना ही बड़ी बात है कि साज सज्जा से लेकर सरकारी नौकरी और शादी तक, सब एक ही सूची में आ गए, सब बिना सोचे किए जा रहे कामों की तरह दिख गए आपको। यही तो होश की शुरुआत है। अब एक बात और देखिए, आप कह रही हैं हममें बोध ही नहीं है, यह जो फैसला है, यह किसने सुनाया। यह वाक्य भी उसी सोए हुए मन का हिस्सा है या यह देखने वाली आँख का। जिस पल आप कह रही हैं मुझमें बोध नहीं, उस पल कोई तो देख रहा है ना कि बोध नहीं है, वही देखने वाला बोध का पहला कतरा है, पूरी नींद नहीं। इस देखने को बनाए रखिए, यही असली शुरुआत है। आचार्य जी के सत्रों और परीक्षाओं की ओर भी बढ़िए, यह देखना वहाँ और गहरा होगा।


















