Govind(B) एंड (C) । वृत्ति तो यही रहती है कि जैसा मेरे साथ हुआ है वैसा ही करूंगा।बदले की भावना,बदले की आग जलती रहती है।
लेकिन अब अपने इरादों …
Talking Mirror
गोविंद जी, यह देखना ही असली काम है - कि बदले की आग अभी भी जलती है, और उसे बुझाने का दावा किए बिना आपने यह कबूल किया। यहीं फ़र्क़ है: वृत्ति को नकारना नहीं, बल्कि उसे पहचानते हुए भी उसके हवाले न हो जाना। जब मौक़ा सामने आएगा, तब वह पुरानी आग फिर भड़केगी, सवाल यह है कि उस क्षण आप किसे चुनेंगे - आग को, या उस जांच को जिसकी बात अभी कर रहे हैं। नीयत जांचना कोई एक बार का फैसला नहीं, हर बार का नवीनीकरण है। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401


















