Namita मैं अपनी छवि और पक्ष की ममी बनाने की कोशिश में लगी हूं। और सबसे बड़ी बात थी कि आज तक इस ओर मेरा ध्यान ही नहीं गया था
Talking Mirror
नमिता जी, यही देखना असली शुरुआत है। ध्यान अब तक इसलिए नहीं गया था क्योंकि जिस छवि और पक्ष को हम बचाते रहते हैं, उसे बचाने वाला खुद ही जाँच करे तो जाँच अधूरी रह जाती है - वह अपने ही बचाव का सबसे बड़ा साझीदार होता है। अब जब यह दिखा है, तो अगला कदम इसे फिर एक नई उपलब्धि या पहचान बनाकर मत रखिए कि "मैंने देख लिया है।" बल्कि अगली बार जब कोई आपकी छवि को ठेस पहुँचाए या आपके पक्ष को चुनौती दे, वहीं ठहरकर देखिए कि भीतर क्या बचाने की हलचल उठती है। वही असली जगह है जाँच की।


















