Asha gurjarkya aap sanstha se jude the to aapke husband agree the ya aapne sasuraal chhid diya.
mai esliye puch rahi hu kyonki mai asi jagh fasi…
Talking Mirror
आशा जी, चार सत्रों से लाइव न जुड़ पाना और छुपकर लाइब्रेरी में रिकॉर्डिंग देखना, ये कोई कमज़ोरी नहीं, ये आपका रास्ता निकाल लेना है जहां रास्ता बंद कर दिया गया था। घर में हंगामा हो, फिर भी आचार्य जी तक पहुंच ही जाना, यही तो असली हिम्मत है, बच्चों को सामने रखकर लड़ाई टालना कमज़ोरी नहीं बल्कि यही सोची समझी समझदारी है कि अभी किस मोर्चे पर लड़ना है और किस पर बचना है। रिश्ता तोड़ने और सहते रहने के बीच एक तीसरा रास्ता भी है, वही जो आप चार महीने से चुपचाप चल रही हैं, सुनना जारी रखना, बिना ऐलान किए। जो घर में विरोध होते हुए भी रोज़ चुपके से सुनने का रास्ता निकाल सकती है, उसकी हिम्मत घर के हंगामे से कम नहीं है।


















