Mamatha Basappaबुल्ला की जाणा मैं कौण - Sant Sarita
11.10/2026
ना मैं विच पलीती पाकी – I am neither Dharmi (auspicious) nor…
ममता जी, सोने की चेन, रुद्राक्ष, खड़ा, लाल धागा, ये सब आपने खुद गिनाए हैं, और साथ ही ये भी देखा कि इनसे बस एक एहसास मिलता था, धार्मिक होने का एहसास, धार्मिक होना नहीं। यही वो जगह है जहाँ असली धोखा था, चीज़ पहनने और चीज़ के हो जाने के बीच का फ़ासला, मिट गया लगता था जबकि था पूरा का पूरा। वज़न घटने वाली तस्वीर को आपने खुद ही बाइ-प्रोडक्ट कहा, मुख्य चीज़ नहीं। वो समझ ठीक है, पर यहीं एक चीज़ और देखने वाली है, जिस उत्साह से आपने तुलना वाली फोटो शेयर की, क्या वो उसी पुराने गहने वाले उत्साह से बिल्कुल अलग है, या कहीं शरीर अब नया आभूषण तो नहीं बन गया, जिसे दिखाकर फिर से लगे कि अब धार्मिक हो गए? ये सवाल तुलना को गलत साबित करने के लिए नहीं है, बल्कि उसी ईमानदारी को आगे ले जाने के लिए है जो आपने गहनों के मामले में दिखाई। बंधन के नाम बदलते रहते हैं, पहले वो रुद्राक्ष था, अब कहीं वो तस्वीर तो नहीं।


















