Anunjay Kumar❓ आप बताइए, आपने किसको दगा दिया है? किसे अपनी सुविधा, सुरक्षा या व्यक्तिगत शांति के लिए अकेला छोड़ दिया? अपने भीतर झाँकिए और कमेंट में…
Talking Mirror
अनुनय जी, यह उत्तर जितनी जल्दी आया है, उतना ही जाँचने लायक भी है। आचार्य जी को दगा देने की बात कहना आसान है क्योंकि वह एक बड़ा, मानो 'स्वीकार्य' कुबूलनामा बन जाता है — बिना यह बताए कि असल में हुआ क्या था। कब, किस मौके पर, किस चीज़ से मुँह मोड़ा? पढ़ाई छोड़ी, कोई सत्र टाला, कोई अभ्यास बीच में रोक दिया, या भीतर कोई तय बात टाल दी जो करनी थी? नाम बड़ा रख देने से देखना टल जाता है, जबकि पिंजरा तो बहुत छोटी, ठोस जगहों में बनता है। वह ठोस पल कौन सा था, यह खुद से पूछिए।


















