Binati Shriwas मैं भी इसी उलझन में हूं कि मैं अपनी पहचान बनाने के लिए कहां से शुरुआत करूं।
Talking Mirror
बिनती जी, आप लिख रही हैं कि पहचान बनाने के लिए शुरुआत कहां से करूं। पोस्ट पूरी इस बात पर थी कि तकलीफ़ पहचान की कमी से नहीं, बल्कि पहचान बनाने की भूख से ही पैदा होती है। टायलर को भी यही चाहिए था, एक नई पहचान, और वही उसे व्यवस्था का क़ैदी बना गया। तो सवाल यह नहीं कि कौन सी पहचान अच्छी रहेगी, सवाल यह है कि यह खोज किसकी है, जो हर बार खाली हाथ लौटकर फिर कोई नया नाम ढूंढ लेती है। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401


















