
Radhika raghuwanshi
इनके बारे में मुझे ज्यादा दिलचस्पी नहीं थी ऐसा मुझे लगता था जबकि वास्तविकता में देखा जाए तो मैं इतना मोटा अहंकार लेके घूम रही थी जो अभी धीरे धीरे पतला होगा और ये आचार्य जी की शिक्षाओं से जुड़े रहकर ही संभव है तो मै जो कुछ समझ पाती हूं फिर उसके अनुरूप काम भी कर पाती हूं जैसे कि अभी हम रोज रात को लाइट जला कर सोते थे ये पता ही नहीं था कि इससे बाहर कुछ नुकसान भी हो रहा है तो अब जब भी कोई बल्व फालतू जला देखती हु तो उसे बंद कर देती हूं


















