
• सितंबर के अंत में नेपाल इस आपदा में 1,490 से अधिक लोगों की जान चली गई और हजारों लोग लापता हो गए। नेपाल के मुस्टैंग जिले और हिमालयी क्षेत्रों में इस क्लाइमेट इवेंट का सबसे गंभीर असर देखा गया। • इंडोनेशिया सुलावेसी द्वीप पर मूसलाधार बारिश के बाद एक साथ बाढ़ और भूस्खलन भारी मात्रा में बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा और लोग विस्थापित हुए। • भारत में सितंबर के आखिर में देश के 23 राज्यों में भारी बारिश, आंधी और बिजली गिरने की घटनाएं जबकि पश्चिमी राजस्थान से मानसून की विदाई अपने सामान्य समय से देरी से हुई। 2. यूरोप और अमेरिका में रिकॉर्ड तोड़ हीटवेव और सूखा अत्यधिक गर्मी और लू के कारण यूरोप में स्वास्थ्य आपातकाल जैसे हालात बन गए। • इस भीषण गर्मी का असर स्विट्जरलैंड के ग्लेशियरों पर भी पड़ा, जहां हीटवेव के कारण केवल कुछ ही समय में ग्लेशियरों की 5% बर्फ पिघल गई, जिसे वैज्ञानिकों ने 'पिघलने की दर में विस्फोट'कहा है। 3. अटलांटिक और प्रशांत महासागर में चक्रवात सितंबर के महीने में प्रशांत महासागर में उठा हरिकेन पोलो एक अत्यंत खतरनाक कैटेगरी 5 का मेजर हरिकेन बना, जिसने अपनी तीव्र हवाओं और तूफानी लहरों से तटीय क्षेत्रों में बड़ा खतरा पैदा किया। • अल नीनो के अजीब प्रभावों के चलते सितंबर की शुरुआत तक अटलांटिक महासागर में तूफानों की शुरुआत रिकॉर्ड स्तर पर बेहद धीमी रही। 4. दक्षिण अमेरिका में सूखा और जंगलों की आग । • ब्राजील और पराग्वे जैंसें देशों में अल नीनो के कारण ऐतिहासिक सूखे की स्थिति बनी रही, जिससे अमेज़न के जंगलों और आसपास के क्षेत्रों में आग लगने की घटनाएं तेजी से बढ़ीं, और कृषि क्षेत्र को भारी नुकसान उठाना पड़ा। इसमें महंगाई, बीमारी,मानसिक तनाव,बिजली की किल्लत,रोजगार का संकट,स्वच्छ हवा पानी,यातायात प्रभावित हुआ।


















