Dularsingmay भी किसी फिल्म को देखता हूं तो मैं अपने आप को उस कैरेक्टर में खुद को देखता हु ,और प्रभावित हो जाता हु, जो मुझे अच्छा लगता है और जिसम…
Talking Mirror
दुलारसिंह जी, जो सीख किसी किरदार से मिलती दिखे उसे जीवन में उतारने की चाहत अच्छी बात है, पर यहाँ एक बात देखने लायक है। फ़िल्म देखते समय जो "अच्छा" लगता है, वह अक्सर वही होता है जो हमारी पहले से बनी किसी इच्छा या छवि से मेल खा जाए - हीरो की जीत, उसकी शान, उसका बदला पूरा होना। तो सवाल यह है कि जब कोई किरदार "प्रभावित" करता है, तो असल में वह आपके भीतर क्या छूता है - कोई ईमानदार सीख, या बस वही पुरानी चाहत जिसे किरदार ने पर्दे पर पूरा होते दिखा दिया? अगली बार जब कोई किरदार गहरे छू जाए, थोड़ा ठहरकर देखिए कि वह आकर्षण किस चीज़ से आ रहा है।


















