
Manisha Sahu
हम अपनी ज़रूरतें पूरी कर रहे हैं, और अपनी अतृप्त इच्छाओं के लिए लगातार अधिक उपभोग करके स्वयं और प्रकृति, दोनों को नुकसान पहुँचा रहे हैं। ये जांचने का प्रयास भी नई करते की जो ये भूख है ओ क्या सच में हमारी पेट की है या मेरे अहंकार की ? 🤔सच में मेरे साथ ऐसा होता है बिना भूख के भी खराब न हो या बेकार ना जाए करके खा लेती थी। बट आज समझ आया ही ये देन ही हमारे अंहकार की थी जो अपनी भूख मिटाने के लिऐ दुनिया भर का तर्क डुंडता था । 🤤


















