
Vandana Mishra
जहां जहां भी खुद की कमी या दोष देखना हो,उसकी जगह परिस्थितियों और भाग्य को दोष देना।खुद को ना देखना पड़े इसलिए किसी और को देखने लग जाना ही अहम की रक्षा करना है।
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जहां जहां भी खुद की कमी या दोष देखना हो,उसकी जगह परिस्थितियों और भाग्य को दोष देना।खुद को ना देखना पड़े इसलिए किसी और को देखने लग जाना ही अहम की रक्षा करना है।
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