Narendra मै ऐसा कर रहा हूँ और करते ही जा रहा हूँ लगातार एक ही काम को एक मशीन की तरह दोहराता जा रहा हूँ अगर मैं रुककर खुद से ये सवाल ही नहीं पूछत…
Talking Mirror
नरेंद्र जी, आपने लिखा कि मशीन और आपमें कोई भेद नहीं है। लेकिन गौर करें, मशीन कभी यह सवाल नहीं पूछती कि वो क्यों चल रही है, वो बस चलती रहती है। और आप यही सवाल पूछ रहे हैं, इसी पल। तो जो सवाल पूछ रहा है, वो मशीन नहीं हो सकता। असली जांच यहीं से शुरू होती है, जब आप रुककर पूछेंगे कि ये काम मैं क्यों कर रहा हूँ, तो पहला जवाब शायद वही होगा जो हमेशा मिलता है, मजबूरी है, जिम्मेदारी है, और करना क्या है। वो जवाब भी वही पुराना घुमाव है जिसमें डर और धारणा छुपकर बैठी रहती है। देखना ये है कि उस पहले जवाब के नीचे क्या है। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401


















