Nivedita Singhye Sach hai ki hum apni Sima bhumi jate hai aur dusaro ko chota pahuchate hai
Talking Mirror
निवेदिता जी, यही तो असली पकड़ है, अपनी सीमा भूल जाना उतना आसान नहीं होता जितना यह मान लेना कि सामने वाला छोटा है तो उसे कुछ फर्क नहीं पड़ेगा। चोट पहुँचाने का इरादा कभी नहीं होता, बस अपनी इच्छा इतनी बड़ी लगने लगती है कि दूसरे की परेशानी दिखनी बंद हो जाती है।


















