
sunita barnwal
उसे अपनी पहचान की उपकरण बना लेने की। अहंकार को लगता है मै शुरू से अध्यात्म किताब पढ़ता हूं लेकिन अब आचार्य जी को सुन रही हूं तो जबकि वो अब नये विचार सुन नहीं रहा है। अपनी मान्यता को पुष्ट कर रहा है।
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उसे अपनी पहचान की उपकरण बना लेने की। अहंकार को लगता है मै शुरू से अध्यात्म किताब पढ़ता हूं लेकिन अब आचार्य जी को सुन रही हूं तो जबकि वो अब नये विचार सुन नहीं रहा है। अपनी मान्यता को पुष्ट कर रहा है।
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