
नमस्ते ! आपके इस गहरे और सटीक विश्लेषण के लिए बहुत बहुत धन्यवाद! आपने बिल्कुल सच कहा मे सिलेबस से नही बल्कि उस परीछा रिजल्ट और जज किये जाने के डर से भाग रही हु जो सिलेबस के साथ आता हैं दूसरी किताबें पढ़ते समय मेरा आजाद और निडर रहता है इसलिए वहा समय का पता हि नही चलता । में अभी कॉलेज में सोशियोलॉजी से MA कर रही हु और साथ हि ssc की तैयारी भी कर रही हु कॉम्पीटिशन और रिजल्ट के इस दबाव के कारण सिलेबस खोलते हि मेरा मन घबराने लगता हैं और एक एक मिनट भारी होने लगता है आपकी इस बात ने मेरी आँखे खोल दी है की यहा मेरे अहंकार और डर की चालाकी है अब में इस डर को पहचान कर बिना रिजल्ट की चिंता किये सिलेबस को भी shif जानने के कोतुहाल से पढ़ने की पुरी कोशिश करूंगी। सही मार्गदर्शन के लिए आभार !🙏🏻


















