
Muskan Gupta
मुझे रोना तब आता है जब मुझे लगता है कि मेरा जीवन वेस्ट जा रहा है, घर की सारी जिम्मेदारियों को निभाने के पीछे । मुझे भी अपने लिए कुछ करना चाहिए लेकिन मैं खुद के लिए कुछ नहीं कर पाती हूं ,बस यही सोच कर रोना आता है । और ऐसा नहीं है कि मैने खुद के लिए कुछ करने की कोशिश नहीं की बहुत बार बाहर कुछ करने की कोशिश करी लेकिन बाहर निकल ही नहीं पाई । बस तभी रोना बहुत आता है।


















