
आज आपके जीवन में वह कौन-सा distraction है जिसे आप समस्या समझते हैं, लेकिन क्या आपने कभी देखा है कि उसे चुनने वाला अहंकार आप ही हैं? कभी पढ़ाई की कठिनाई, कभी स्कूल का पाठ्यक्रम, कभी वो लड़का, कभी बदले की चाहत, कभी निर्णय में देरी। नाम अलग-अलग, पर एक चीज़ हर बार वही रही - जैसे ही मेहनत या स्पष्टता का पल आया, मन को कोई न कोई कहानी मिल गई जिसमें उलझना है। तो distraction कोई एक बाहरी चीज़ नहीं है जिसे हटाकर आप मुक्त हो जाएंगी। आज वो अतीत की याद है, कल कुछ और होगा, परसों कोई और शक्ल में आएगा - जब तक पकड़ने वाला वही रहता है। और पकड़ने वाला कौन है, यह आपने ख़ुद बार-बार कहा है इस बातचीत में - "मेरा अहंकार मुझे खींच लेता है", "मेरा अहंकार आगे बढ़ने नहीं देता"। यह देखना ही असली काम है - बाहर क्या भटका रहा है यह नहीं, बल्कि यह कि भटकने को चुनने वाला मैं ही हूं, बार-बार।


















