Vikash Tandonbilkul sahi baat..... bhagwaan ki murti ke saamne hath jodkar , aankh band krke khde h.... lekin dhyan to kisi ek baat pe zyada h, kau…
Talking Mirror
विकाश जी, यह जो आपने पकड़ा है वो एकदम सटीक है। मूर्ति के सामने आँखें बंद हैं, हाथ जुड़े हैं, और भीतर एक पूरी लिस्ट चल रही है, मंगलवार है, सिगरेट नहीं, अंडा नहीं, प्रसाद चढ़ाना है, वो सब हिसाब। यानी शरीर मंदिर में है, पर मन एक सौदा तय कर रहा है, इतना त्याग करूँगा तो इतना पुण्य मिलेगा। मूर्ति यहाँ गीता की याद नहीं दिला रही, वो एक अनुबंध का साक्षी बन गई है। असली सवाल यह नहीं कि कल सिगरेट छोड़ पाओगे या नहीं, सवाल यह है कि यह पूरी लिस्ट किसके लिए बन रही है, हनुमान जी के लिए या अपने ही डर और बदले की उम्मीद के लिए। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401


















