Ravinapranam acharya ji 🙏
pehle mai bhi khud ko dusro ke najar se dekhati thi ki mujhe kya pahena chahiye or kaise rahna chahiye but jab ach…
Talking Mirror
रविना जी, वापस अपनी पुरानी दुनिया में पाना, यही वो पल है जो असली जानकारी देता है। समझ आ जाना आसान है, सुनते वक़्त मन राज़ी हो जाता है, मुश्किल वहाँ से शुरू होती है जब वही पुरानी नज़र, पुराना आईना फिर से सामने आ जाता है। ये लौटना बताता है कि देह वाली पहचान अभी भी कहीं मज़बूती से बैठी है, सुनने से वो हिली है, टूटी नहीं। इसी को बार बार देखते रहने का काम है, सत्र और सीख में लगे रहिए, यही नज़र धीरे धीरे बदलती है। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401


















