
Lokesh
अहंकार अपने आप में चालक बनने की कोशिश करता है वह सोचता है कि कम दाम में अच्छी वस्तु मिल जाए , वैसे ही जैसे झूठ के साथ सत्य भी मिल जाए।
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अहंकार अपने आप में चालक बनने की कोशिश करता है वह सोचता है कि कम दाम में अच्छी वस्तु मिल जाए , वैसे ही जैसे झूठ के साथ सत्य भी मिल जाए।
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