
1. सकारात्मक संकेत (विधि) ब्रह्म: विशाल आत्मन्: स्वयं सत्: अस्तित्व चित्: चेतना आनन्द: परमसुख सत्यम्: सत्य ज्ञानम्: ज्ञान पूर्णम्: पूर्णता साक्षी: द्रष्टा तुरीय: चतुर्थ पुरुष: भीतर बसने वाला परमात्मन्: परम आत्मा ईश्वर: प्रभु तत्: वह एकम्: एक अहम्: मैं शिवम्: मंगलमय नित्यम्: शाश्वत शुद्धम्: शुद्ध बुद्ध: जागृत चैतन्य मुक्तम्: नित्य-मुक्त कूटस्थ: अपरिवर्तनशील स्वयंप्रकाश: स्वयं-प्रकाशित प्रज्ञानम्: शुद्ध प्रज्ञा अन्तर्यामी: अन्तःप्रेरक नकारात्मक संकेत (निषेध, "नेति नेति") 26. नेति-नेति: यह नहीं, यह नहीं 27. अद्वैत: दो नहीं 28. अद्वितीय: जिसका कोई दूसरा नहीं 29. निर्गुण: गुणरहित 30. निराकार: आकाररहित 31. निर्विकार: विकाररहित 32. निष्क्रिय: क्रियारहित 33. निरञ्जन: निष्कलंक 34. निर्मल: मलरहित 35. निर्विकल्प: संकल्प-विकल्प से रहित 36. निरुपाधिक: उपाधिरहित 37. अजम्: अजन्मा 38. अजात: कभी उत्पन्न नहीं हुआ 39. अनादि: आदिरहित 40. अनन्त: अन्तरहित 41. अचिन्त्य: चिन्तन से परे 42. अव्यक्त: अप्रकट 43. अव्यय: अविनाशी 44. अक्षर: अक्षय 45. अमृत: मृत्युरहित 46. अभय: भयरहित 47. असङ्ग: संगरहित 48. अप्रमेय: अपरिमेय 49. अनिर्वचनीय: अवर्णनीय 50. अशरीर: देहरहित 2 - सकारात्मक ही होती है क्योंकि पहले समझा जाना नहीं था और अब इनकी बात नहीं करता हूँ क्योंकि में जो भी कहूंगा वो विकृत ही होगा इसलिए न बात करना बेहतर है । कारण - ऐतिहासिक हैं , सांस्कृतिक है स्वयं अहंकार की बनावट है।


















