
1️⃣ भारत में स्त्री को देवी माना जाता हैं और देवी कि छवी जैसी होती हैं वैसा हम महीला को होना चाहिए ऐसा दावा भी किया जाता हैं। सौम्य ,कोमल मर्यादा में बंधी।और जो समाज स्त्री को देवी के रुप में देखता हैं ,उस स्त्री कि हालत उतनी ही बुरी बना दी गयी हैं।भारत में जिस भी प्रतीक को भगवान से जोडकर देखा गया हैं उसकी हालत उतनी बुरी कर दी जाती हैं। 🌿समाज में स्त्री को लेकर मान्यता......... महीला कि इज्जत उसके काम से नहीं कि, जाती उसके शरीर से कि जाती हैं।अगर एक स्त्री खुद के बलबुते पर कुछ करना चाहती हैं तो सामने स्त्री का शरीर आता हैं।अगर कोई लडकी किसी लडके साथ बात भी कर ले तो उससे कहा जाता हैं,हमारी घर की इज्जत ऐसे सरे आम निलाम करोगी क्या? लडकी को बचपन से ही सजने सवरने को सिखा दिया जाता हैं।समाज स्त्री को एक उपभोग कि वस्तु के अलावा ज्यादा कुछ मानता नहीं ।यहा कैसे पदक आ सकते हैं। घर - परीवार से स्त्री को लेकर मान्यता.......... हमारे घरो में स्त्री को लेकर बहुत सी मान्यता गढ दि गयी हैं।माॅं तो सिर्फ घर का काम करती हैं,वह बाहर जाकर कुछ कमा नहीं सकती, क्योंकि वह बहुत कमजोर हैं।बहुत भारी काम उससे नहीं होगा। जैसे खेल के क्षेत्र मे कही बार खेल के हिसाब से कपडे पहनने होते हैं। लेकीन यहा हमारी मान्यता आ जाती हैं।छोटे कपडे पहन कर इज्जत की निलामी कर रही हैं, ऐसे अनगिनत ताने हर स्त्री के लिये तयार होते हैं। लोकधर्म........... हाल के समय मे यह हुआ हैं,विनेश पोगाट जी ने कुस्ती में पदक हासिल किया हैं ,पहीले कुस्ती सिर्फ पुरुष कि दावेदारी वाला खेल माना जाता लेकीन इसमे अब स्त्री भी पदक लेकर आ रही हैं। समाज ने उन्हे ताने देकर उनकी जो स्त्री के लिए मान्यता हैं उसको तोड मरोड दिया हैं। 2️⃣क्योंकि अहंकार कि उत्पत्ती शरीर में ही होती है, वही उसका घर हैं। अहंकार रहता हैं उसी जगह वह सबसे ज्यादा नुकसान करता हैं। अंहकार किसी का सगा नहीं हैं। शरीर के साथ दशको कि वृत्ती हैं जो अहंकार को पोषण देती हैं, इसका सहारा लेकर अहंकार हमारा इस्तेमाल करता हैं।


















