
१.)वेदांत में सत्य को समझाने के लिए अनेक शब्दों का प्रयोग किया जाता है , इनमें कुछ शब्द सकारात्मक होते है , जबकि कुछ नकारात्मक।। करुणा मोक्ष ब्रह्म आत्मा चेतना ज्ञान मुक्ती स्वतंत्रता शांति आनंद प्रेम सत्य निर्भरता संतोष समता पवित्रता विवेक वैराग्य जागरूकता सहजता पूर्णता अमरत्व निडरता विश्वास श्रद्धा धैर्य साहस दया क्षमता उदारता निष्कामता निरहंकार निरपेक्षता निस्वार्थ असंगता अनासक्ति अद्वैत एकत्व अखंडता अनंतता शुद्धता सरलता मौन स्थिरता समर्पण आत्मबोध आत्मज्ञान निर्विकारता निरामयता सकारात्मक शब्द: दया, क्षमा,साहस,करुणा, संतोष, प्रेम, आनन्द, शांति, स्वतंत्रता, ज्ञान, पूर्णता जैसे सकारात्मक भाव व्यक्त करते हैं।तथा निडरता,निरहंकार, अनासक्ति और निष्कामता जैसे शब्द नकारात्मक उपसर्गों से बने होने पर भी सकारात्मक अर्थ रखते है ।इसलिए केवल शब्द के रूप को नहीं ,बल्कि उसके वास्तविक अर्थ को समझना आवश्यक है । २.) मेरे अनुसार ,जीवन में सत्य या उच्चतम की बात करते समय मेरी भाषा अधिकतर नकारात्मक से शुरू होती है , क्योंकि मैं अक्सर यह बताने का प्रयास करती हूं कि क्या गलत ,क्या छोड़ना चाहिए और किन भ्रमों से बाहर निकलना चाहिए । हमें अहंकार नहीं करना चाहिए,किसी से ज्यादा अटैचमेंट भी नहीं रखनी चाहिए और झूठ का सहारा तो बिल्कुल भी नहीं लेना चाहिए । वेदांत के according,सत्य को सिर्फ अवॉइड करने से नहीं बल्कि उसे समझने से जाना जा सकता है ,मेरी लैंग्वेज का उद्देश्य केवल गलत चीज़ों का विरोध करना नहीं बल्कि सत्य ,प्रेम और freedom को पहचानना भी आना चाहिए । मेरे लिए महत्वपूर्ण यह है कि मैं शब्दों में उलझने के बजाय उनके वास्तविक अर्थ को समझू और अपने जीवन में सत्य को अपनाने का प्रयास करूं ।।


















