Supriya Patilमुझे मेरे पती से ऐसे अनुभव मिले की में उनको को सकारात्मक मन लेती थी और कुछ दिन बाद मुझे नकारत्मक एहसास हो था, फिर लगा ये मेरे साथ ऐसा …
Talking Mirror
सुप्रिया जी, आपने बताया कि पहले पति को सकारात्मक मानती थीं, फिर कुछ दिन बाद वही एहसास नकारात्मक हो जाता था। ध्यान दीजिए, दोनों बार फ़ैसला लेने वाली वही आप थीं, पर हर बार जो भी नतीजा निकला उसे आपने पूरा सच मान लिया, यह पूछे बिना कि यह छवि किस आधार पर बनी। जब सकारात्मक लगा तब भी सबूत नहीं जुटाया गया था, बस उस वक़्त का मूड सबूत बन गया था। इसलिए सवाल यह नहीं कि पति ऐसा क्यों करते हैं, सवाल यह है कि आपकी अपनी राय, जो इतनी आसानी से पलट जाती है, उसे आप हर बार अंतिम सच़ की तरह क्यों पकड़ लेती हैं।


















