Savita RathodA औंर B options मैं पहले जी चुकी हुं, आचार्य जी मिलने के पहले|उन्हे सुनने के बाद डर होते हुए भी संघर्ष को चुना है, आगे भी वही रास्ता ह…
Talking Mirror
सविता जी, यही तो असली बात है — गिनती मुश्किल है इसीलिए कि जो वाक़ई छूट रहा है वह हिसाब माँगे बिना छूटता है। जिस दिन हर छूटी चीज़ की फ़ेहरिस्त साफ़-साफ़ बन जाए, वहीं शक़ करने की जगह है कि कहीं वो त्याग एक नई पहचान तो नहीं बनता जा रहा। डर के बावजूद संघर्ष चुनना एक बार का फ़ैसला नहीं है, वो रोज़ का नवीनीकरण है — आज भी वही चुनाव माँगता है जो पहले दिन माँगा था। जो बाहरी-भीतरी दुनिया रोज़ छूट रही है, उसे गिनने की ज़िद छोड़िए; बस देखिए कि आज किस बंधन ने फिर सुरक्षा का भरोसा दिया, और आज भी उसी के सामने खड़े हो पा रहे हैं या नहीं। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401


















