
1️⃣ जहाँ कई विकसित देशों में महिलाओं की खेल उपलब्धियाँ राष्ट्रीय सफलता का बड़ा आधार हैं, वहीं भारत में अक्सर लड़कियों को खेलों से हतोत्साहित किया जाता है और उनके पहनावे या शरीर तक चर्चा सीमित रह जाती है। इसके पीछे कौन-सी गहरी मान्यताएँ काम करती हैं? हाल के समय से कुछ उदाहरण देकर बताइये की कैसे लोकधर्म इसमें एक बड़ी भूमिका निभाता है। इसके पीछे वो मान्यता आ रही है जिसने सदियों से स्त्री को केवल देह मात्र समझा है वो भी उनके शोषण के लिए। इस मान्यता ने स्त्रियों के लिए जो उनके संभावना रोकने का पूरा काम किया है। लोकधर्म में ये बात चलती आ रहा ही कि स्त्री का स्थान केवल घर तक है वो भी किसी के अधिकार के भीतर। तुम स्त्री को तुम्हारा काम समाज में केवल परिवार बढ़ना उनको सम्भालना है बाकी सब काम मर्दो का है। इस मान्यता ने स्त्रियों को हर क्षेत्र में पीछे कर दिया। अज्ञान वश स्त्रियों ने भी स्वीकार कर लिया। स्वार्थों की पूर्ति के लिए। 2️⃣ आचार्य जी शरीर को अहंकार की पहली कॉलोनी क्यों कहते हैं? क्योंकि कि अहंकार की कोई हस्ती नहीं है वो विषयों के सहारे स्वयं को हस्ती बताता है। और शरीर अहंकार का पहला विषय होता है जिसे अपना कह कर ये मैं हूँ का भाव आता है। शरीर के सहारे ही वो अन्य विषयों को भोगता है। 3️⃣ क्या आप जिन जगहों पर काम करते हैं या पढ़ते हैं, वे आपको खेल के लिए प्रोत्साहित करती हैं? अगर आप कोई खेल खेलते हैं, तो अपनी फ़ोटो या वीडियो कम्युनिटी पर ज़रूर साझा करें। आफिस में कोई खेल नहीं। मैंने आचार्य जी से जुड़ने के बाद तैराकी और बैडमिंटन खेलना शुरू किया।


















