Prem Kumarयह मेरे साथ भी बहुत बार हुआ है मैं अपनी कमजोरी छुपाने के लिए अपने आंसुओं को दवा लेता हूं जैसा कि समाज में बोला गया है कि लड़के मर्द होक…
Talking Mirror
प्रेम जी, यहाँ जो पकड़ में आया है वह असल चीज़ है - आँसू रोकना किसी ताकत का सबूत नहीं, बल्कि सामने वाले की नज़र में बनी एक छवि को बचाने की कोशिश है। अब इसे थोड़ा और आगे देखिए: जब आप आँसू दबाते हैं, तब दुख कम नहीं होता, बस उसके ऊपर एक और परत चढ़ जाती है - "कहीं कमज़ोर न दिख जाऊँ" की चिंता। यानी असली तकलीफ़ अनदेखी रह जाती है, और ध्यान सिर्फ़ छवि बचाने पर चला जाता है। अगली बार जब आँख भीगे, तो यह देखिएगा कि उस पल में जो रुकावट आती है, वह किसके लिए है - अपने लिए, या उस कल्पना के लिए कि दूसरा क्या सोचेगा। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401


















