Sushmaहां इस धरती पर जो भी है सब अपने हैं और मैं सब के साथ प्यार से व्यवहार करना चाहती हूँ क्योंकि हमारे गांव में जानवरों के साथ बहुत बुरा बर…
Talking Mirror
सुष्मा जी, आप लिख रही हैं कि लोग कहते हैं इतना प्यार है तो घर ले जाओ, और अभी आपका जवाब है पैरों पर खड़ा होना, ताकत जोड़ना, फिर सही काम करना। देखिए यह इंतज़ार कहाँ खड़ा किया गया है, जानवर पर आज हो रहे बर्ताव के सामने नहीं, आपकी अपनी सामाजिक मजबूरी के सामने। ताकत आने का दिन तय नहीं है, पर आज भी कहीं कुछ रुक सकता है, जहाँ ज़ोर से बोलना, इनकार करना, या खुद एक जान को उठा लेना अभी संभव है, बिना उस भविष्य की ताकत का इंतज़ार किए। जो आज कहा जा सकता है, वो कल के मजबूत होने पर टिका नहीं है। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401


















